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सावन 2026 — उत्तर और दक्षिण भारत की अलग-अलग तारीखें, सोमवार व्रत और पूजा विधि की पूरी गाइड

Sawan 2026 North Aur South India Ki Alag Dates, Somwar Vrat Aur Puja Vidhi — Complete Guide

📅 27 June 20269 min✍ KundliAI

सावन 2026 में उत्तर और दक्षिण भारत की तारीखें अलग क्यों हैं? जानें North India में 30 जुलाई से और South India में 13 अगस्त से सावन शुरू होने की पूरी वजह, 4 सोमवार की लिस्ट, पूजा विधि और राशि अनुसार उपाय। Sawan 2026 complete guide.

# सावन 2026 — उत्तर और दक्षिण भारत की अलग-अलग तारीखें, सोमवार व्रत और पूजा विधि की पूरी गाइड

हर साल एक ही सवाल लाखों लोगों को परेशान करता है — "इस बार सावन कब से शुरू हो रहा है?"

और 2026 में यह सवाल और भी जरूरी हो गया है, क्योंकि इस बार उत्तर भारत और दक्षिण भारत में सावन की तारीखें एकदम अलग हैं। एक तरफ UP, Rajasthan, MP वाले 30 जुलाई से व्रत शुरू करेंगे, दूसरी तरफ Maharashtra, Karnataka, Tamil Nadu वाले 13 अगस्त से।

और इस बीच सोशल मीडिया पर तरह-तरह की dates वायरल हो रही हैं — कोई कह रहा 11 जुलाई, कोई 18 जुलाई, कोई 30 जुलाई। भ्रम बहुत है।

तो आज इस ब्लॉग में सब कुछ एकदम clear करते हैं — Sawan 2026 की सही तारीखें, आपके राज्य के हिसाब से, साथ में पूजा विधि और राशि अनुसार उपाय।

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सावन 2026 — उत्तर भारत की तारीखें (Purnimanta Calendar)

अगर आप इन राज्यों में रहते हैं:

Uttar Pradesh · Rajasthan · Madhya Pradesh · Punjab · Bihar · Jharkhand · Himachal Pradesh · Uttarakhand · Chhattisgarh

तो आपके लिए सावन 2026 की dates हैं:

| | तारीख |

|--|-------|

| सावन शुरू | 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) |

| सावन समाप्त | 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) |

उत्तर भारत के सावन सोमवार 2026

| सावन सोमवार | तारीख | विशेष महत्व |

|------------|-------|-------------|

| पहला सावन सोमवार | 3 अगस्त 2026 | सबसे शुभ — पहला व्रत |

| दूसरा सावन सोमवार | 10 अगस्त 2026 | रक्षाबंधन के पास |

| तीसरा सावन सोमवार | 17 अगस्त 2026 | स्वतंत्रता दिवस के बाद |

| चौथा सावन सोमवार | 24 अगस्त 2026 | अंतिम सोमवार — अत्यंत पुण्यकारी |

ज्योतिष मत: पहला और आखिरी सावन सोमवार सबसे ज्यादा फलदायी होते हैं। जो लोग सभी 4 व्रत नहीं रख सकते, वे कम से कम 3 अगस्त और 24 अगस्त का व्रत जरूर रखें।

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सावन 2026 — दक्षिण और पश्चिम भारत की तारीखें (Amanta Calendar)

अगर आप इन राज्यों में रहते हैं:

Maharashtra · Gujarat · Karnataka · Andhra Pradesh · Telangana · Tamil Nadu · Goa

तो आपके लिए सावन 2026 की dates हैं:

| | तारीख |

|--|-------|

| सावन शुरू | 13 अगस्त 2026 (गुरुवार) |

| सावन समाप्त | 11 सितंबर 2026 (शनिवार) |

दक्षिण भारत के सावन सोमवार 2026

| सावन सोमवार | तारीख |

|------------|-------|

| पहला सावन सोमवार | 17 अगस्त 2026 |

| दूसरा सावन सोमवार | 24 अगस्त 2026 |

| तीसरा सावन सोमवार | 31 अगस्त 2026 |

| चौथा सावन सोमवार | 7 सितंबर 2026 |

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उत्तर और दक्षिण में अलग तारीखें क्यों? (सबसे जरूरी सवाल)

यह सबसे common confusion है। और इसका जवाब बहुत simple है।

भारत में दो तरह के Hindu calendars follow होते हैं:

1. Purnimanta Calendar — उत्तर भारत में follow होता है। इसमें महीना पूर्णिमा (full moon) पर खत्म होता है।

2. Amanta Calendar — दक्षिण और पश्चिम भारत में follow होता है। इसमें महीना अमावस्या (new moon) पर खत्म होता है।

इन दोनों calendars में लगभग 15 दिनों का अंतर होता है — और इसी वजह से सावन की शुरुआत दोनों regions में अलग होती है।

दोनों 100% सही हैं। बस आपको अपने राज्य का calendar follow करना है।

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सावन 2026 में खास क्या है?

इस बार सावन के साथ कुछ बड़ी astronomical घटनाएं भी हो रही हैं।

1. सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश: सावन माह में सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करता है — जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग होता है। यह transit बताता है कि इस सावन में कौन सी राशि के लिए कौन सा उपाय सबसे कारगर होगा।

2. भगवान शिव ग्रहों के स्वामी: ज्योतिष शास्त्र कहता है कि सावन में भगवान शिव की पूजा से सभी अशुभ ग्रहों — मंगल, शनि, राहु, केतु — का प्रभाव कम होता है।

3. मानसून की ऊर्जा: जैसे बारिश गर्मी के बाद धरती को नई ऊर्जा देती है, वैसे ही सावन की आराधना आपके जीवन की रुकी हुई चीजों को फिर से गति देती है।

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सावन सोमवार व्रत और पूजा विधि — Step by Step

व्रत की तैयारी (एक दिन पहले रविवार को)

  • रात से ही सात्विक भोजन करें
  • मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज से पूरी तरह परहेज करें
  • मन में "ॐ नमः शिवाय" का स्मरण करते हुए सोएं

सोमवार की सुबह (ब्रह्म मुहूर्त — सुबह 4 से 6 बजे)

1. स्नान: गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान करें। तिल डालकर स्नान करने से अतिरिक्त पुण्य मिलता है।

2. संकल्प: हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर शिव जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

पूजा सामग्री — क्या-क्या चाहिए?

  • बेलपत्र (3, 5 या 11 पत्ते — हमेशा विषम संख्या में)
  • धतूरा और आक के फूल
  • गंगाजल और कच्चा दूध
  • शहद, दही, घी, शक्कर (पंचामृत के लिए)
  • चंदन, भस्म, रोली
  • सफेद फूल (शिव जी को सफेद रंग सबसे प्रिय है)
  • धूप, दीप, कपूर

पूजा विधि (Step by Step)

1. जलाभिषेक: "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हुए शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करें

2. पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें

3. बेलपत्र: तीन-तीन बेलपत्र चढ़ाएं — पीठ ऊपर की ओर होनी चाहिए

4. फूल अर्पण: सफेद फूल और धतूरा चढ़ाएं

5. धूप-दीप: देसी घी का दीपक जलाएं

6. आरती: शिव जी की आरती करें

7. प्रदक्षिणा: शिवलिंग की 3 या 7 परिक्रमा करें — ध्यान रहे, अर्धचंद्र के आकार में, पूरी नहीं

8. क्षमा प्रार्थना: पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा माँगें

व्रत का खाना — क्या खाएं, क्या नहीं?

खा सकते हैं: फल, दूध, दही, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, मखाने, सेंधा नमक

📖

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न खाएं: अनाज, सामान्य नमक, मांसाहार, प्याज, लहसुन

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राशि के अनुसार सावन 2026 में क्या करें?

हर किसी की कुंडली अलग होती है। एक जैसा उपाय सबके लिए काम नहीं करता।

मेष, वृश्चिक (मंगल राशि): लाल फूल की जगह सफेद फूल चढ़ाएं। मंगल दोष से मुक्ति के लिए विशेष रुद्राभिषेक करवाएं।

वृषभ, तुला (शुक्र राशि): सफेद चंदन और सफेद फूल अर्पित करें। विवाह में देरी है तो हर सोमवार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

मिथुन, कन्या (बुध राशि): बेलपत्र पर "ॐ नमः शिवाय" लिखकर अर्पित करें। करियर और व्यापार में सफलता मिलेगी।

कर्क (चंद्र राशि): कच्चे दूध से अभिषेक विशेष फलदायी है। मानसिक शांति के लिए शिव सहस्रनाम का पाठ करें।

सिंह (सूर्य राशि): घी और शहद से अभिषेक करें। नेतृत्व क्षमता और सम्मान में वृद्धि होगी।

धनु, मीन (गुरु राशि): पीले फूल और केसर युक्त दूध चढ़ाएं। शिक्षा और ज्ञान में उन्नति होगी।

मकर, कुंभ (शनि राशि): काले तिल और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि दोष से मुक्ति और करियर में उन्नति।

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सावन 2026 के तीन सबसे शक्तिशाली उपाय

1. रुद्राभिषेक — सर्वोच्च उपाय

सावन में रुद्राभिषेक का पुण्य किसी भी अन्य पूजा से कई गुना अधिक होता है। अगर मंदिर में संभव न हो, तो घर पर "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जाप करते हुए जलाभिषेक करें।

2. महामृत्युंजय मंत्र

> ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

सावन में प्रतिदिन 108 बार इस मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य, दीर्घायु और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है।

3. कांवड़ यात्रा

उत्तर भारत में सावन का सबसे बड़ा उत्सव। लाखों कांवड़िए Haridwar, Gangotri या अन्य पवित्र स्थानों से गंगाजल लाकर अपने स्थानीय शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। इस बार यात्रा उत्तर भारत के सावन कैलेंडर के साथ — जुलाई के अंत से अगस्त तक — चलेगी।

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सावन 2026 के महत्वपूर्ण त्योहार

उत्तर भारत

| तारीख | त्योहार |

|-------|---------|

| 30 जुलाई 2026 | सावन शुरू (North India) |

| 3 अगस्त 2026 | पहला सावन सोमवार |

| 9 अगस्त 2026 | हरियाली तीज |

| 11 अगस्त 2026 | नाग पंचमी |

| 24 अगस्त 2026 | चौथा (अंतिम) सावन सोमवार |

| 28 अगस्त 2026 | रक्षाबंधन + सावन समाप्त |

दक्षिण भारत

| तारीख | त्योहार |

|-------|---------|

| 13 अगस्त 2026 | सावन शुरू (South India) |

| 17 अगस्त 2026 | पहला सावन सोमवार |

| 29 अगस्त 2026 | Varalakshmi Vratam |

| 7 सितंबर 2026 | चौथा (अंतिम) सावन सोमवार |

| 11 सितंबर 2026 | सावन समाप्त |

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सावन में क्या करें, क्या न करें?

करें:

  • हर सोमवार सुबह शिवलिंग पर जलाभिषेक करें
  • बेलपत्र जरूर चढ़ाएं — यह शिव को सबसे प्रिय है
  • सोमवार को सफेद वस्त्र पहनें
  • "ॐ नमः शिवाय" का जाप दिनभर करते रहें
  • किसी जरूरतमंद को भोजन या जल दान करें

न करें:

  • मांस, मदिरा का सेवन न करें
  • बाल और नाखून न काटें (पारंपरिक मान्यता)
  • किसी से झगड़ा या वाद-विवाद न करें
  • झूठ न बोलें, दूसरों की बुराई न करें

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FAQ — सावन 2026 से जुड़े सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल

सावन 2026 कब से शुरू होगा?

उत्तर भारत में सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी और 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। दक्षिण और पश्चिम भारत में 13 अगस्त 2026 से शुरू होकर 11 सितंबर 2026 को समाप्त होगा।

उत्तर और दक्षिण भारत में सावन की अलग तारीखें क्यों हैं?

उत्तर भारत Purnimanta calendar follow करता है और दक्षिण भारत Amanta calendar। इन दोनों में लगभग 15 दिनों का अंतर होता है। दोनों dates सही हैं — बस अपने राज्य का calendar follow करें।

2026 में कितने सावन सोमवार हैं?

उत्तर भारत में 4 सावन सोमवार — 3, 10, 17 और 24 अगस्त। दक्षिण भारत में भी 4 सावन सोमवार — 17, 24, 31 अगस्त और 7 सितंबर।

सावन सोमवार व्रत कैसे रखें?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके शिवलिंग पर जलाभिषेक करें, बेलपत्र और सफेद फूल चढ़ाएं, "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें और दिनभर फलाहार करें। शाम को आरती के बाद व्रत खोलें।

सावन में बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं?

शास्त्रों के अनुसार एक बेलपत्र चढ़ाने का पुण्य एक हजार कमल के फूल चढ़ाने के बराबर है। बेलपत्र भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है।

क्या सावन में मांस खाना वर्जित है?

हाँ, सावन में मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन वर्जित माना जाता है।

सावन में कौन सा मंत्र जपें?

"ॐ नमः शिवाय" सबसे सरल और प्रभावी है। स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी है।

रक्षाबंधन 2026 कब है?

रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को है, जो उत्तर भारत में सावन का अंतिम दिन भी है।

सावन में कांवड़ यात्रा कब होती है?

कांवड़ यात्रा उत्तर भारत के सावन कैलेंडर के साथ होती है — जुलाई के अंत से अगस्त तक। कांवड़िए Haridwar, Gangotri जैसे तीर्थ स्थानों से गंगाजल लेकर अपने स्थानीय शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।

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