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करवा चौथ 2026 कब है? चांद निकलने का समय, पूजा मुहूर्त और व्रत विधि

Karwa Chauth 2026 Kab Hai? Chand Nikalne Ka Samay, Puja Muhurat Aur Vrat Vidhi

📅 20 October 2026⏱ 10 min✍ KundliAI Editorial Team
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KundliAI Editorial Team

Content researched using classical Vedic astrology texts (Brihat Parashara Hora Shastra) and cross-verified through KundliAI's Swiss Ephemeris-based calculation engine. हमारी पद्धति जानें →

Karwa Chauth 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर को है। दिल्ली में चांद रात 8:17 बजे निकलेगा। जानें 11 शहरों का चंद्रोदय समय, पूजा मुहूर्त, सरगी और व्रत विधि।

संक्षेप में: करवा चौथ 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। दिल्ली में चांद लगभग रात 8:17 बजे निकलेगा और पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 से 6:56 बजे तक है। व्रत सूर्योदय (लगभग सुबह 6:31) से चंद्रोदय तक रखा जाता है। चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1:06 बजे शुरू होकर उसी दिन रात 10:09 बजे समाप्त होगी।

करवा चौथ उत्तर भारत की सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा व्रत है। इस दिन पत्नी अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती है। इस लेख में आपको 2026 की सही तारीख, आपके शहर में चांद निकलने का समय, सरगी से लेकर व्रत खोलने तक की पूरी विधि, करवा चौथ की कथा और राशि के अनुसार पहनने वाले रंग, सब एक जगह मिलेंगे।


करवा चौथ 2026: तारीख और मुहूर्त एक नज़र में

  • तारीख: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
  • चतुर्थी तिथि शुरू: 29 अक्टूबर, रात 1:06 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर, रात 10:09 बजे
  • करवा चौथ पूजा मुहूर्त: शाम 5:38 से 6:56 बजे तक
  • व्रत का समय: सुबह लगभग 6:31 से रात 8:17 बजे तक
  • चंद्रोदय (चांद निकलने का समय): रात लगभग 8:17 बजे

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(सभी समय नई दिल्ली के अनुसार)

करवा चौथ हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इसी दिन संकष्टी चतुर्थी भी होती है, इसलिए इस दिन भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व है।


करवा चौथ 2026: शहर अनुसार चांद निकलने का समय

चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, क्योंकि यह आपके शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर करता है। नीचे दिए गए समय पंचांग गणना पर आधारित अनुमानित समय हैं:

29 अक्टूबर 2026 को चांद निकलने का समय:

  • कोलकाता: शाम 7:47 बजे
  • लखनऊ: रात 8:06 बजे
  • चंडीगढ़: रात 8:12 बजे
  • नई दिल्ली: रात 8:17 बजे
  • जयपुर: रात 8:28 बजे
  • हैदराबाद: रात 8:41 बजे
  • चेन्नई: रात 8:44 बजे
  • अहमदाबाद: रात 8:52 बजे
  • बेंगलुरु: रात 8:55 बजे
  • पुणे: रात 8:58 बजे
  • मुंबई: रात 9:00 बजे

ध्यान दें: ऊपर दिया गया समय वह है जब चंद्रमा क्षितिज पर आता है। बादल, धुंध या ऊंची इमारतों की वजह से चांद 10 से 20 मिनट देर से दिखाई दे सकता है। इसलिए दिए गए समय से थोड़ा पहले छत पर तैयार रहें और धैर्य रखें।

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विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए: अमेरिका और कनाडा में करवा चौथ स्थानीय समय के अनुसार बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को पड़ सकता है। अपने शहर का स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

अपने शहर के अन्य शुभ मुहूर्त जानने के लिए KundliAI का मुहूर्त टूल भी देख सकते हैं।


करवा चौथ का महत्व

करवा चौथ दो शब्दों से बना है: करवा यानी मिट्टी का टोंटी वाला पात्र, और चौथ यानी चतुर्थी तिथि। इस दिन करवे से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, इसलिए इसका नाम करवा चौथ पड़ा।

इस दिन करवा माता (माता गौरी), भगवान शिव, भगवान गणेश, कार्तिकेय और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से रखा गया यह व्रत पति की आयु बढ़ाता है और दांपत्य जीवन में प्रेम और स्थिरता लाता है।

ज्योतिष की दृष्टि से चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। करवा चौथ की रात चंद्रमा की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। यही कारण है कि यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूरा माना जाता है।


सरगी कब और कैसे खाएं?

सरगी करवा चौथ के व्रत की शुरुआत है। यह आमतौर पर सास अपनी बहू को देती है। अगर सास साथ न हों, तो कोई बड़ी सुहागिन महिला या आप स्वयं भी सरगी तैयार कर सकती हैं।

  • समय: सूर्योदय से पहले, यानी 29 अक्टूबर को सुबह लगभग 4:30 से 6:00 बजे के बीच
  • क्या खाएं: सूखे मेवे, फल, फेनी या सेवइयां, मठरी, नारियल पानी और पानी
  • सुझाव: पानी और फल ज्यादा लें ताकि दिन भर शरीर में पानी की कमी न हो। बहुत ज्यादा तला-भुना या नमकीन खाने से प्यास ज्यादा लगती है


करवा चौथ पूजा सामग्री

पूजा से एक दिन पहले यह सामग्री तैयार कर लें:

  • मिट्टी या तांबे का करवा (टोंटी वाला पात्र) और ढक्कन
  • छलनी
  • पूजा की थाली: रोली, चावल (अक्षत), कुमकुम, हल्दी, मौली
  • दीपक, घी और रुई की बत्ती
  • धूप या अगरबत्ती
  • मिठाई, फल और फूल
  • सुहाग का सामान: चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी
  • करवा माता का चित्र या कैलेंडर
  • जल से भरा लोटा (चंद्रमा को अर्घ्य के लिए)
  • कथा की पुस्तक


करवा चौथ व्रत विधि: सुबह से रात तक

1. सुबह: सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें, फिर स्नान करके व्रत का संकल्प लें। संकल्प में मन ही मन कहें कि आप पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए यह व्रत रख रही हैं।

2. दिन भर: निर्जला व्रत रखें, यानी भोजन और पानी दोनों नहीं। दिन में भगवान शिव-पार्वती और गणेश जी का ध्यान करें।

3. शाम की तैयारी: सोलह श्रृंगार करें। दीवार पर या कागज पर करवा माता का चित्र बनाएं या लगाएं।

4. पूजा (शाम 5:38 से 6:56 के बीच): करवे में जल भरकर ढक्कन पर मिठाई रखें। करवा माता, शिव-पार्वती और गणेश जी की पूजा करें। रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें।

5. कथा: परिवार की अन्य महिलाओं के साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें। कथा के बाद थाली को सात बार आपस में घुमाने की परंपरा भी कई परिवारों में होती है।

6. चंद्र दर्शन: चांद निकलने पर छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा को देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।

7. अर्घ्य: करवे के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और पति की लंबी आयु की कामना करें।

8. व्रत खोलना: पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें। इसके बाद बड़ों का आशीर्वाद लें।


करवा चौथ की कथा (संक्षेप में)

एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी, जिसका नाम वीरावती था। विवाह के बाद पहली करवा चौथ पर वीरावती अपने मायके में थी और उसने निर्जला व्रत रखा। शाम होते-होते वह भूख और प्यास से व्याकुल हो गई।

बहन की हालत भाइयों से देखी नहीं गई। उन्होंने पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी की आड़ से रोशनी दिखाई और कहा कि चांद निकल आया है। वीरावती ने उसे चांद समझकर अर्घ्य दिया और व्रत खोल लिया। व्रत खोलते ही उसे पति के गंभीर रूप से बीमार होने का समाचार मिला।

दुखी वीरावती ने पूरे वर्ष श्रद्धा से चतुर्थी के व्रत रखे और अगली करवा चौथ पर पूरे विधि-विधान से व्रत किया। उसकी सच्ची श्रद्धा से करवा माता प्रसन्न हुईं और उसके पति को नया जीवन मिला।

इस कथा का संदेश यही है कि व्रत को पूरी निष्ठा से और चंद्र दर्शन के बाद ही खोलना चाहिए।


राशि अनुसार करवा चौथ पर कौन सा रंग पहनें?

ज्योतिष में हर राशि का एक स्वामी ग्रह होता है, और हर ग्रह का एक प्रिय रंग माना जाता है। करवा चौथ पर अपनी राशि के स्वामी ग्रह से जुड़ा रंग पहनना शुभ माना जाता है। परंपरागत रूप से इस दिन काले और सफेद रंग से बचा जाता है।

  • मेष (स्वामी मंगल): लाल, मैरून
  • वृषभ (स्वामी शुक्र): गुलाबी, सिल्वर
  • मिथुन (स्वामी बुध): हरा
  • कर्क (स्वामी चंद्रमा): सिल्वर, हल्का लाल
  • सिंह (स्वामी सूर्य): नारंगी, सुनहरा
  • कन्या (स्वामी बुध): हरा, हल्का पीला
  • तुला (स्वामी शुक्र): गुलाबी, सिल्वर
  • वृश्चिक (स्वामी मंगल): लाल, मैरून
  • धनु (स्वामी गुरु): पीला, सुनहरा
  • मकर (स्वामी शनि): गहरा नीला, मैरून
  • कुंभ (स्वामी शनि): नीला, बैंगनी
  • मीन (स्वामी गुरु): पीला, सुनहरा

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करवा चौथ पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • सूर्योदय से पहले सरगी खाएं और पर्याप्त पानी पिएं
  • पूजा मुहूर्त के भीतर पूजा और कथा पूरी करें
  • चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें
  • बड़ों का आशीर्वाद लें

क्या न करें:

  • व्रत के दिन किसी से कटु वचन न बोलें या झगड़ा न करें
  • सुई-धागे और कैंची का काम करने से परंपरागत रूप से परहेज किया जाता है
  • बिना चंद्र दर्शन के व्रत न खोलें
  • दिन में सोने से बचें

स्वास्थ्य का ध्यान: गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज़ या किसी अन्य बीमारी से जूझ रही महिलाएं या दवा लेने वाली महिलाएं निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ऐसी स्थिति में फलाहार या जल के साथ व्रत रखने की परंपरा भी कई परिवारों में मान्य है। श्रद्धा भाव से रखा गया व्रत ही असली व्रत है।


करवा चौथ और कुंडली मिलान

करवा चौथ पति-पत्नी के रिश्ते का त्योहार है। ज्योतिष में किसी भी रिश्ते की मजबूती को समझने के लिए कुंडली मिलान (गुण मिलान) देखा जाता है, जिसमें 36 गुणों के आधार पर दोनों की कुंडली की अनुकूलता जांची जाती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

करवा चौथ 2026 कब है?

करवा चौथ 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ता है।

करवा चौथ 2026 में चांद कितने बजे निकलेगा?

दिल्ली में 29 अक्टूबर 2026 को चांद लगभग रात 8:17 बजे निकलेगा। लखनऊ में लगभग 8:06, जयपुर में 8:28 और मुंबई में लगभग 9:00 बजे चंद्रोदय होगा।

करवा चौथ 2026 का पूजा मुहूर्त क्या है?

दिल्ली के अनुसार करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है।

करवा चौथ की सरगी कब खानी चाहिए?

सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है। 29 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय लगभग सुबह 6:31 बजे है, इसलिए सरगी सुबह 4:30 से 6:00 बजे के बीच खा लें।

अगर बादलों की वजह से चांद न दिखे तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में पंचांग में दिए चंद्रोदय के समय के बाद चंद्रमा की दिशा (पूर्व) की ओर मुख करके अर्घ्य दिया जा सकता है। कई परिवार भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान करके भी व्रत खोलते हैं। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लें।

क्या कुंवारी लड़कियां करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

हां, कई जगहों पर अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। उनके लिए चंद्रमा की जगह तारों को देखकर व्रत खोलने की परंपरा भी कुछ परिवारों में है।

क्या गर्भवती महिलाएं करवा चौथ का निर्जला व्रत रख सकती हैं?

गर्भावस्था में लंबे समय तक बिना पानी के रहना सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें और फलाहार या जल के साथ व्रत रखें।

करवा चौथ पर किस भगवान की पूजा होती है?

इस दिन करवा माता (माता गौरी), भगवान शिव, भगवान गणेश, कार्तिकेय और चंद्रदेव की पूजा की जाती है।

करवा चौथ पर छलनी से चांद क्यों देखते हैं?

छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा और फिर पति को देखने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे चंद्रमा की शीतलता और शुभ ऊर्जा पति तक पहुंचती है। यह परंपरा वीरावती की कथा से भी जुड़ी है।

क्या पति भी करवा चौथ का व्रत रख सकते हैं?

हां, आजकल कई पति भी अपनी पत्नी के साथ यह व्रत रखते हैं। शास्त्रों में इसकी कोई मनाही नहीं है, यह आपसी प्रेम और सम्मान का प्रतीक है।


और पढ़ें

*नोट: इस लेख में दिए गए समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।*

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