संक्षेप में: गुरु (बृहस्पति) 31 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 11 बजे (IST) कर्क से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। पर यह पहला दौर छोटा है: 13 दिसंबर को गुरु वक्री होंगे और 25 जनवरी 2027 को वापस कर्क में चले जाएंगे। सिंह राशि में गुरु का असली, लंबा गोचर 26 जून से 26 नवंबर 2027 तक रहेगा। चंद्र राशि से गिनें तो यह गोचर मेष (5वां भाव), कर्क (2रा), तुला (11वां), धनु (9वां) और कुंभ (7वां) के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। असली फल आपकी कुंडली में गुरु की स्थिति और चल रही दशा से तय होता है।
गुरु लगभग 12 साल में राशिचक्र का एक चक्कर पूरा करते हैं, इसलिए उनका राशि बदलना साल की सबसे बड़ी ज्योतिषीय घटनाओं में गिना जाता है। इस बार की खास बात यह है कि गुरु सिंह में "आकर लौटेंगे"। बहुत से लेख सिर्फ 31 अक्टूबर की तारीख बताते हैं और यह नहीं बताते कि तीन महीने बाद गुरु कर्क में वापस होंगे। नीचे पूरी तस्वीर है।
गुरु गोचर 2026-27: पूरी तारीखें
| तारीख (IST) | क्या होगा |
|---|---|
| 2 जून 2026 | गुरु कर्क राशि में (अपनी उच्च राशि) |
| 31 अक्टूबर 2026, सुबह लगभग 11 बजे | कर्क से सिंह में प्रवेश |
| 13 दिसंबर 2026 | सिंह में गुरु वक्री |
| 25 जनवरी 2027 | वक्री गुरु वापस कर्क में |
| 13 अप्रैल 2027 | कर्क में गुरु मार्गी |
| 26 जून 2027 | फिर से सिंह में, इस बार लंबे समय के लिए |
| 26 नवंबर 2027 | सिंह से कन्या में |
ये तारीखें लाहिड़ी अयनांश के हिसाब से निकाली गई हैं, जो ज़्यादातर भारतीय पंचांगों में इस्तेमाल होता है। अलग पंचांगों में प्रवेश का समय कुछ घंटे आगे-पीछे दिख सकता है।
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Free Kundli बनाएं — 30 सेकंड में →पिछले साल भी गुरु ने ठीक ऐसा ही किया था। 18 अक्टूबर 2025 को वे कर्क में गए, 5 दिसंबर 2025 को वक्री होकर मिथुन में लौटे, और 2 जून 2026 से कर्क का असली गोचर शुरू हुआ। जिन लोगों ने पिछले नवंबर में "गुरु कर्क में आ गए" सुनकर बड़े फैसले जल्दी ले लिए थे, उन्हें बाद में समझ आया कि पूरा असर जून 2026 से दिखा। इस बार भी वही नियम लागू होता है: 31 अक्टूबर से 25 जनवरी तक का समय एक झलक है, पूरा असर जून 2027 से दिखेगा।
कर्क से सिंह: इसका मतलब क्या है?
कर्क गुरु की उच्च राशि है। यहां गुरु भावनाओं, परिवार और देखभाल के ज़रिए फल देते हैं। सिंह सूर्य की राशि है और सूर्य गुरु के मित्र हैं, इसलिए सिंह में भी गुरु मज़बूत माने जाते हैं, बस उनका रंग बदल जाता है। सिंह का संबंध नेतृत्व, सम्मान, सरकार, संतान, रचनात्मकता और आत्मविश्वास से है। सीधी भाषा में, कर्क वाला गुरु "घर संभालने" वाला था, सिंह वाला गुरु "आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी लेने" वाला है।
सिंह से गुरु की पांचवीं दृष्टि धनु पर, सातवीं दृष्टि कुंभ पर और नौवीं दृष्टि मेष पर पड़ेगी। इन तीन राशियों को गुरु के गोचर भाव के साथ उनकी दृष्टि का भी लाभ मिलेगा।
इसी दौरान दो और बड़े बदलाव हो रहे हैं: 6 दिसंबर 2026 को राहु मकर में और केतु कर्क में जाएंगे, और 11 दिसंबर 2026 को शनि मीन राशि में मार्गी होंगे। इसलिए दिसंबर 2026 कई राशियों के लिए दिशा बदलने वाला महीना रहेगा।
गुरु गोचर 2026: सभी 12 राशियों पर प्रभाव
नीचे हर राशि के लिए भाव उसकी चंद्र राशि को पहला भाव मानकर गिना गया है। शास्त्रों में चंद्र राशि से 2, 5, 7, 9 और 11वें भाव का गुरु शुभ माना जाता है, बाकी भावों में मिला-जुला। मिला-जुला का मतलब बुरा नहीं है, इसका मतलब है कि वहां फल मेहनत और समझदारी से मिलता है।
मेष राशि: गुरु 5वें भाव में
पढ़ाई, संतान, प्रेम और नए विचारों का भाव। प्रतियोगी परीक्षा या कोई नई skill सीखने वालों के लिए यह अच्छा समय है, और संतान की इच्छा रखने वाले दंपती के लिए भी इसे शुभ माना जाता है। गुरु की नौवीं दृष्टि आपकी अपनी राशि पर है, जो साढ़े साती के दबाव में मन को सहारा देगी। जनवरी से जून 2027 में गुरु चौथे भाव में रहेंगे, तब घर और परिवार के काम आगे आएंगे।
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मुफ़्त कुंडली बनाएं ✦वृषभ राशि: गुरु 4थे भाव में
घर, मां, वाहन और मन की शांति का भाव। घर की मरम्मत, नया घर या शहर बदलने की बात चल सकती है। यह भाव गुरु के लिए मिला-जुला माना जाता है, इसलिए property के कागज़ और loan की शर्तें ध्यान से पढ़ें। शनि 11वें भाव में आमदनी को स्थिर रखेंगे, इसलिए बड़ा खर्च सोच-समझकर करें तो दिक्कत नहीं।
मिथुन राशि: गुरु 3रे भाव में
मेहनत, छोटी यात्राएं, भाई-बहन और communication का भाव। तीसरा गुरु अपने आप बड़ा फल नहीं देता, आपको खुद कदम उठाना होगा। लिखने, बोलने, sales या content का काम करने वाले इस समय का अच्छा इस्तेमाल कर सकते हैं। दिसंबर से राहु आठवें भाव में होंगे, इसलिए जोखिम वाले निवेश से दूर रहें।
कर्क राशि: गुरु 2रे भाव में
जून 2026 से गुरु आपकी ही राशि में थे, अब वे धन और परिवार के भाव में जा रहे हैं। बचत बढ़ाने, परिवार में शुभ काम और बोलचाल से फायदा मिलने का समय माना जाता है। 6 दिसंबर से केतु आपकी राशि में होंगे, जिससे मन कभी-कभी अलग-थलग महसूस कर सकता है। जनवरी से जून 2027 में गुरु फिर आपकी राशि में लौटकर उसी केतु को संभालेंगे।
सिंह राशि: गुरु 1ले भाव में (जन्म का गुरु)
गुरु आपकी अपनी राशि में आ रहे हैं। लोग आपकी बात ज़्यादा सुनेंगे, आत्मविश्वास बढ़ेगा और नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है। पहले भाव का गुरु शास्त्रों में हमेशा आसान नहीं माना जाता: वज़न, खान-पान और "मैं ही सही हूं" वाले भाव पर नज़र रखें। गुरु की दृष्टि 5वें, 7वें और 9वें भाव पर है, यानी संतान, विवाह और भाग्य तीनों को सहारा। शनि की ढैया चल रही है, इसलिए यह गुरु उस दबाव को हल्का करेगा।
कन्या राशि: गुरु 12वें भाव में
खर्च, विदेश, अस्पताल और आध्यात्म का भाव। विदेश यात्रा, तीर्थ या किसी अच्छे काम पर खर्च के योग बनते हैं। इस भाव का गुरु पैसा रोकने में कमज़ोर माना जाता है, इसलिए दिखावे के खर्च से बचें। शनि सातवें भाव में हैं, साझेदारी के फैसले जल्दी न लें। जनवरी से जून 2027 में गुरु 11वें भाव में लौटकर लाभ का एक अच्छा मौका देंगे।
तुला राशि: गुरु 11वें भाव में
लाभ, बड़े लक्ष्य और जान-पहचान का भाव। तुला राशि के लिए यह गोचर सबसे अच्छे में से एक है। रुका हुआ पैसा, नए client, या किसी बड़े व्यक्ति की मदद मिल सकती है। शनि छठे भाव में मुकाबले में आपको आगे रखेंगे। दोनों ग्रह एक साथ अच्छी स्थिति में हों, ऐसा कम होता है, इसलिए जून 2027 से नवंबर 2027 का समय बड़े लक्ष्य के लिए खास है।
वृश्चिक राशि: गुरु 10वें भाव में
करियर और प्रतिष्ठा का भाव। नौकरी में ज़िम्मेदारी बदल सकती है, transfer या नई भूमिका मिल सकती है। दसवां गुरु शास्त्रों में "स्थान परिवर्तन" का संकेत माना जाता है, इसलिए हर बदलाव को नुकसान न समझें। दिसंबर से राहु तीसरे भाव में आपकी हिम्मत और पहल बढ़ाएंगे। ऑफिस की राजनीति से दूर रहें और काम को लिखित में रखें।
धनु राशि: गुरु 9वें भाव में
गुरु आपकी राशि के स्वामी हैं और अब भाग्य भाव में जा रहे हैं। उच्च शिक्षा, लंबी यात्रा, पिता और गुरुजनों से सहयोग, और धर्म में रुचि बढ़ने का समय माना जाता है। गुरु की पांचवीं दृष्टि भी आपकी राशि पर है। शनि की ढैया (चौथा भाव) घर में थोड़ी बेचैनी दे सकती है, पर गुरु का साथ उसे संतुलित रखेगा।
मकर राशि: गुरु 8वें भाव में
अचानक घटनाओं, रिसर्च, बीमा और विरासत का भाव। आठवां गुरु सावधानी का संकेत है: बड़ा उधार, बिना कागज़ का लेन-देन और सेहत की अनदेखी से बचें। अच्छी बात यह है कि शनि तीसरे भाव में आपकी मेहनत को फल दे रहे हैं। 6 दिसंबर से राहु आपकी राशि में होंगे, इसलिए यह समय जल्दबाज़ी नहीं, धैर्य मांगता है। रिसर्च, जांच या ज्योतिष जैसे गहरे विषयों में यही गुरु अच्छी पकड़ देता है।
कुंभ राशि: गुरु 7वें भाव में
विवाह और साझेदारी का भाव, और गुरु की सातवीं दृष्टि सीधे आपकी राशि पर। अविवाहित लोगों के लिए रिश्ते की बात आगे बढ़ने का समय माना जाता है, और business partnership के लिए भी यह अच्छा गोचर है। शनि अभी आपकी साढ़े साती के अंतिम पड़ाव पर हैं और 3 जून 2027 को मेष में चले जाएंगे। इसलिए 2027 की दूसरी छमाही कुंभ वालों के लिए काफी राहत भरी हो सकती है।
मीन राशि: गुरु 6ठे भाव में
प्रतियोगिता, कर्ज, सेहत और रोज़ के काम का भाव। छठा गुरु शास्त्रों में कमज़ोर माना जाता है: काम का बोझ बढ़ सकता है और विरोधी सक्रिय रह सकते हैं। शनि आपकी ही राशि में हैं, इसलिए दिनचर्या और नींद पर ध्यान दें। राहत की बात यह है कि 6 दिसंबर से राहु 11वें भाव में लाभ के रास्ते खोलेंगे, और जनवरी से जून 2027 में गुरु पांचवें भाव में लौटकर सहारा देंगे।
एक नज़र में: किस राशि के लिए कैसा
| चंद्र राशि | गुरु का भाव (सिंह में) | शास्त्रीय रूप से | जनवरी-जून 2027 (कर्क में) |
|---|---|---|---|
| मेष | 5वां | शुभ | 4था |
| वृषभ | 4था | मिला-जुला | 3रा |
| मिथुन | 3रा | मिला-जुला | 2रा (शुभ) |
| कर्क | 2रा | शुभ | 1ला |
| सिंह | 1ला | मिला-जुला | 12वां |
| कन्या | 12वां | मिला-जुला | 11वां (शुभ) |
| तुला | 11वां | शुभ | 10वां |
| वृश्चिक | 10वां | मिला-जुला | 9वां (शुभ) |
| धनु | 9वां | शुभ | 8वां |
| मकर | 8वां | मिला-जुला | 7वां (शुभ) |
| कुंभ | 7वां | शुभ | 6ठा |
| मीन | 6ठा | मिला-जुला | 5वां (शुभ) |
आखिरी कॉलम ध्यान से देखें। जिन राशियों के लिए सिंह का गुरु मिला-जुला है, उनमें से कई के लिए जनवरी-जून 2027 का कर्क वाला दौर शुभ है। यानी किसी भी राशि के लिए पूरा 2027 एक जैसा नहीं रहेगा।
अपनी कुंडली में गुरु गोचर कैसे देखें
ऊपर दिए फल चंद्र राशि पर आधारित सामान्य फल हैं। अपने लिए सही तस्वीर तीन बातों से बनती है:
1. लग्न से भाव: जन्म समय पता हो तो देखें कि सिंह राशि आपकी कुंडली के किस भाव में पड़ती है। कई ज्योतिषी लग्न और चंद्र दोनों से फल मिलाकर देखते हैं।
2. जन्म कुंडली में गुरु: अगर जन्म के समय गुरु मज़बूत हैं, तो कमज़ोर गोचर भाव में भी नुकसान कम होता है।
3. दशा: गुरु या शुक्र की महादशा-अंतर्दशा चल रही हो तो गोचर का असर ज़्यादा साफ दिखता है।
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गुरु के आसान उपाय
ये उपाय परंपरा से चले आ रहे हैं और गुरु के कमज़ोर भाव वाली राशियों के लिए खास तौर पर बताए जाते हैं:
- गुरुवार को "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का 108 बार जाप।
- गुरुवार को चने की दाल और हल्दी का दान।
- माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान। शास्त्रों में इसे गुरु का सबसे सीधा उपाय माना गया है।
- किसी ज़रूरतमंद बच्चे की पढ़ाई में मदद।
कोई भी रत्न, जैसे पुखराज, बिना पूरी कुंडली देखे न पहनें।
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अपनी राशि का पूरा 2026 राशिफल: मेष · वृषभ · मिथुन · कर्क · सिंह · कन्या · तुला · वृश्चिक · धनु · मकर · कुंभ · मीन
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गुरु सिंह राशि में कब जाएंगे?
लाहिड़ी अयनांश के हिसाब से 31 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 11 बजे (IST)। कुछ पंचांगों में समय कुछ घंटे अलग दिख सकता है, तारीख वही रहती है।
गुरु सिंह राशि में कितने समय तक रहेंगे?
दो हिस्सों में। पहला दौर 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक, फिर गुरु उल्टी चाल में कर्क में वापस जाएंगे। दूसरा और लंबा दौर 26 जून 2027 से 26 नवंबर 2027 तक, जिसके बाद गुरु कन्या में जाएंगे।
गुरु गोचर 2026 किन राशियों के लिए शुभ है?
चंद्र राशि से 2, 5, 7, 9 और 11वें भाव का गुरु शुभ माना जाता है। इस गोचर में ये भाव कर्क, मेष, कुंभ, धनु और तुला राशि के बनते हैं। बाकी राशियों के लिए फल मिला-जुला रहेगा, और कई के लिए जनवरी-जून 2027 का कर्क वाला दौर अच्छा है।
गुरु वक्री 2026 कब है?
गुरु 13 दिसंबर 2026 को सिंह राशि में वक्री होंगे और 13 अप्रैल 2027 को कर्क राशि में मार्गी होंगे। वक्री रहते हुए ही वे 25 जनवरी 2027 को सिंह से कर्क में लौटेंगे।
क्या 31 अक्टूबर के बाद बड़े फैसले लेने चाहिए?
पहला दौर सिर्फ लगभग तीन महीने का है और दिसंबर से गुरु वक्री हैं। शादी, घर या नौकरी जैसे बड़े फैसले सिर्फ इस गोचर के भरोसे न लें। अपनी दशा और पूरी कुंडली देखकर तय करें, और ज्योतिष को मार्गदर्शन मानें, गारंटी नहीं।
गुरु को मज़बूत करने का सबसे आसान उपाय क्या है?
गुरुवार को "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का जाप, चने की दाल और हल्दी का दान, और शिक्षकों व बड़ों का सम्मान। रत्न पहनने से पहले पूरी कुंडली ज़रूर दिखाएं।